जीएसटी में डेबिट नोट क्या है ?-पूरी जानकारी आसान भाषा में.

नमस्कार दोस्तो ! QuickGuruji ब्लॉग पर आपका स्वागत है.आज के आर्टिकल में हम बात करेंगे डेबिट नोट के कॉन्सेप्ट के बारे में .और जानेंगे आखिर ये डेबिट नोट क्या है ? तो चलिए आर्टिकल शुरू करते है.

दोस्तो डेबिट नोट के कॉन्सेप्ट बारे में आपने जीएसटी या टैली कोर्स में पढ़ा होगा.या फिर शायद कुछ लोगो के लिए ये नया टर्म भी हो सकता है.मगर डरने की जरूरत नहीं है.

आज में आपको यहां कुछ उदाहरणों के जरिए इस कॉन्सेप्ट को समझाने वाला हु,इसलिए उसी प्वाइंट को याद रख कर आपको इस डेबिट नोट के कॉन्सेप्ट को समझ ना है.

मान लीजिए दोस्तो अभी आपका एक नया बिजनेस है.आप इस बिजनेस करने की फील्ड में न्यू हो.फिर भी रिस्क लेकर आपने बिजनेस शुरू किया.और वो बिजनेस अच्छा से चलने लगा.

अब आप बिजनेस करने लगे हो.लोग आपको एक अच्छे बिजनेसमैन की नजरिए से देखने लगे है.अब बिजनेस में क्या होता है, जो भी पर्सन बिजनेस करता है उसे हर महीने में या फिर तीन महीने बाद जीएसटी रिटर्न (GST Return) फाइल करनी होती है.

जिस में आपको आपने बिल (Invoice) की डिटेल जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करनी होती है.क्युकी इन बिल में जो भी गुड्स या सर्विसेस की आपने ट्रांजैक्शन की हुई होगी अपने ग्राहकों के साथ उसकी डिटेल जानकारी उन बिल (Invoice) पर होती है जैसे की,

  • उन गुड्स या सर्विसेस की टैक्सेबल वैल्यू कितनी थी ?
  • कितनी Quantity का ट्रांजेक्शन हम ने उनके साथ किया ?
  • उन Quantity पर क्या टैक्स रेट थे.

और इन्ही बिल की एक कॉपी को हम अपने जीएसटी रिटर्न पर अपलोड कर देते है.और उन बिल में जो भी जीएसटी अमाउंट मेंशन की हुई होती है.उसका पेमेंट भी कर देते है.

मगर कई बार क्या होता है ? आप जब जीएसटी रिटर्न में वो बिल अपलोड करते हो,तो वैल्यू में कुछ फर्क आ जाता है.और इस वैल्यू में फर्क आने के कई सारे कारण हो सकते है जैसे की,

  • ज्यादा या कम माल की सप्लाई होना
  • खराब माल
  • सेल्स रिटर्न etc..

और इन्ही सब के चलते आपको अपने बिल (इनवॉइस) में भी बदलाव करना पड़ता है.अब प्रॉब्लम ये आती है की आप अपने फिजिकल बिल में तो बदलाव आसानी से कर सकते हो.मगर जो बिल एक बार जीएसटी रिटर्न फाइल करते समय अपलोड हो चुके है जीएसटी पोर्टल पर,उन बिल में कुछ Changes नही कर सकते.

इसी प्रॉब्लम को दूर करने के लिए हमारे जीएसटी लॉ में(Debit note and credit note) डेबिट नोट और क्रेडिट नोट का कॉन्सेप्ट Introduce किया गया.

मगर बिजनेस में लोगो को ये कॉन्सेप्ट समझना थोड़ा मुश्किल लगता है.इसलिए आज में आपको इसे बहुत ही आसान भाषा में बताने वाला हु,इसलिए ध्यान से पढ़िए आर्टिकल को.

आज हम इस आर्टिकल में सिर्फ डेबिट नोट के बारे में बात करेंगे.”क्रेडिट नोट क्या होता है ?“इसके बारे में हम अगले आर्टिकल में डिटेल में समझेंगे वो हमारा इस सीरीज का पार्ट टू होने वाला है.अभी फीलाल इतना याद रखे आज हमारा फोकस सिर्फ और सिर्फ डेबिट नोट के कॉन्सेप्ट पर होगा.

डेबिट नोट क्या है In Hindi ?(What Is Debit Note In Hindi )

डेबिट नोट क्या है ?(What Is Debit Note In Hindi)
डेबिट नोट क्या है ?

दोस्तो डेबिट नोट क्या होता है ? इस बात को समझाने के लिए में सबसे पहिले में एक मस्त उदाहरण आपके साथ शेयर करने वाला हु,जिस से आपको ये डेबिट नोट के कॉन्सेप्ट के बारे में थोड़ी आइडिया मिल जायेगी.तो चलिए समझ ते है.

For Example

A लिमिटेड कंपनी ने,X लिमिटेड कंपनी (पार्टी) को पूरे 10,000 रुपए के गुड्स की सप्लाई की.मगर गलती से क्या हो जाता है A लिमिटेड, X लिमिटेड से 9000 रुपए ही चार्ज करता है.और उसी के हिसाब से ही बिल बना लेता है.

अब आप ही सोच कर देखो,A लिमिटेड ने अपने पार्टी को पूरे 10,000 रुपए के गुड्स की सप्लाई की थी.मगर उन्हे X लिमिटेड से 9000 रुपए ही मिले.मतलब A लिमिटेड को 1,000 रुपए कम मिले X लिमिटेड कंपनी से.

और ये बात जब A लिमिटेड को पता चल जायेगी.तो वो X लिमिटेड के खिलाफ तुरंत डेबिट नोट जारी करेगा.जिसका मतलब होता है,की “X लिमिटेड कंपनी” को 1,000 रुपए और देने है “A लिमिटेड” को.

(नोट: दोस्तो इस उपर वाले उदाहरण को,आपको A लिमिटेड कंपनी के साइड से सोचना है.मतलब आप ये सोच कर चलिए आप ही वो A लिमिटेड कंपनी हो.जिस ने 10,000 रुपए का माल की सप्लाई की थी X Limited को.)

इसलिए हमेशा याद रखे जब भी सप्लायर को अपने किसी पार्टी से ओरिजनल अमाउंट के बदले कम अमाउंट का पेमेंट हो जाता है,तब वो सप्लायर अपने उस पार्टी को डेबिट नोट इश्यू करता है.और यही एक सही प्रोसेस होता है.

डेबिट नोट का स्ट्रक्चर कैसा होता है ?

दोस्तो डेबिट नोट या क्रेडिट नोट इन दोनो डॉक्यूमेंट का कोई फिक्स्ड फॉर्मेट जीएसटी लॉ में नहीं बताया गया है.
आप अभी के टाइम गूगल पर जाकर इनका फॉर्मेट देखोगे तो अलग अलग फॉर्मेट वहा आपको देखने मिलेंगे.

लेकिन कुछ ऐसे चीज है,जिनके नाम डेबिट नोट या क्रेडिट नोट में होना जरूरी है जैसे की,

  • सप्लायर का नाम,
  • जीएसटी नंबर और एड्रेस.
  • डेट
  • सीरियल नंबर
  • गुड्स या सर्विसेस को Received करने वाले का नाम,जीएसटी नंबर,एड्रेस
  • क्रेडिट नोट या डेबिट नोट का अमाउंट
  • सिग्नेचर.

डेबिट नोट कब बनाया जाता है ?

डेबिट नोट क्या है ?(What Is Debit Note In Hindi )

दोस्तो उपर आपने डेबिट नोट क्या है ? इसके बारे समझ लिया.मगर अब बात करेंगे सप्लायर की तरफ से डेबिट नोट कब जारी किया जाता है ?.

इसकी एक वजह तो आपको उपर ही पता चल गई है की,जब सप्लायर को अपने किसी पार्टी से ओरिजनल अमाउंट के बदले कम अमाउंट का पेमेंट Received हो जाता है,तब वो सप्लायर अपने उस पार्टी को डेबिट नोट इश्यू करता है.

लेकिन यही एक वजह काफी नही है.एक और कारण है जिसके चलते सप्लायर डेबिट नोट इश्यू करवाता है.और वो कारण है,टैक्स इनवॉइस में गलती से कम जीएसटी चार्ज करना.इन दोनो केस के मामलो में सप्लायर डेबिट नोट इश्यू करवा सकता है.

डेबिट नोट इश्यू करने के बाद,आगे क्या ?

डेबिट नोट क्या होता है ? ये समझ लिए डेबिट नोट कब बनाया जाता है मतलब किन कारणों के चलते इश्यू किया जाता है,ये भी समझ लिया.लेकिन अब इस डेबिट नोट को इश्यू करने के बाद,आगे क्या ? करना होता है ? इसे भी जान लो.

तो दोस्तों एक बार सप्लायर अपने तरफ से जब डेबिट नोट इश्यू करवाता है,तो उस डेबिट नोट की सारी डिटेल वो अपने जीएसटी रिटर्न में भर देता है.जिस से उस सप्लायर की टैक्स लायबिलिटी भी बढ़ जाती है.

लेकिन एक बात याद रखे,जिस महीने में आप ने डेबिट नोट इश्यू किया था.आपको उसी महीने की GST Return में वो सब इनफॉर्मेशन जीएसटी पोर्टल पर अपडेट करनी होती है.

(नोट :दोस्तो उम्मीद करता हु,आपको आर्टिकल पसंद आ गया होगा.लेकिन डेबिट नोट के बारे में एक बात जरूर याद रखे.जीएसटी में Registered बिजनेसमैन ही डेबिट नोट या क्रेडिट नोट इश्यू कर सकते है.जो बिजनेसमैन जीएसटी में Registered नही है,उन्हे डेबिट नोट इश्यू करने का कोई हक नही होता और B2B इस कैटेगरी में ही आप डेबिट नोट इश्यू करवा सकते हो.B2C इस कैटेगरी में डेबिट नोट इश्यू नही किए जाते.)

In Conclusion:

दोस्तो में उम्मीद करता हु की आज के हमारे आर्टिकल में दी गई जानकारी (डेबिट नोट क्या है ?) आपको पसंद आई होगी.और ऐसे ही नए नए इनफॉर्मेशन रीड करने के लिए हमारे वेबसाइट पर दोबारा जरूर विजिट करे.

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